पूर्वी चंपारण में जदयू के चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष होने का दावा करने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन करने के पार्टी के रुख की आलोचना की। उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा भी दे दिया।
जद (यू) अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में अंसारी ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी के रुख ने उन लाखों भारतीय मुसलमानों का भरोसा तोड़ दिया है, जो मानते थे कि जद (यू) धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कायम रखेगा।
पत्र में अंसारी ने कहा कि हमारे जैसे लाखों भारतीय मुसलमानों को धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के एक सच्चे ध्वजवाहक के रूप में आप (नीतीश) पर अटूट विश्वास था। हालांकि, अब यह विश्वास टूट गया है। वक्फ संशोधन विधेयक पर जद (यू) द्वारा अपनाए गए रुख से लाखों समर्पित भारतीय मुसलमानों और कार्यकर्ताओं को गहरा सदमा लगा है। हम ललन सिंह द्वारा लोकसभा में दिए गए भाषण और इस विधेयक के समर्थन को लेकर बेहद निराश हैं।
इसी तरह, मलिक ने खुद को जदयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का सचिव बताया। उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया कि मुसलमान और हमारे जैसे कार्यकर्ता वक्फ विधेयक के मुद्दे पर जदयू के रुख से स्तब्ध हैं।
इस बीच राजीव प्रसाद ने कहा कि जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने दावा किया कि न तो पूर्वी चंपारण के रहने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी और न ही जमुई निवासी नवाज मलिक पार्टी के पदाधिकारी हैं। वह (अंसारी) कौन हैं? वह कभी भी पार्टी में कोई महत्वपूर्ण पदाधिकारी या प्रमुख व्यक्ति नहीं रहे। मैं उन्हें जानता भी नहीं हूं। उन्होंने पार्टी में कभी कोई पद नहीं संभाला, यहां तक कि जिला स्तर पर भी नहीं।
वरिष्ठ मंत्री एवं वरिष्ठ जद (यू) नेता विजय कुमार चौधरी ने भी कहा कि संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक के लिए पार्टी के समर्थन को लेकर जद (यू) के भीतर कोई भ्रम नहीं है।
edited by : Nrapendra Gupta
You may also like
सुनों सुनों सुनों, राजमा की खेती का आ गया समय, 18 हजार क्विंटल तक मिल सकता है भाव, जाने राजमा की खेती कैसे करें किसान ⁃⁃
इंदिरा का बांग्लादेश बनाम मोदी का बांग्लादेश ⁃⁃
आचार्य चाणक्य की नीतियों से सीखें कुत्ते के गुण
मुरैना में संदिग्ध मौत: पत्नी और बेटियों पर हत्या का आरोप
मुख्तार माई: पाकिस्तान की साहसी बेटी की प्रेरणादायक कहानी