उज्जैन, 5 अप्रैल . भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शनिवार को चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर चौबीस खंभा माता पूजन के साथ नगर पूजा की शुरुआत हुई. नगरवासियों की सुख समृद्धि की कामना को लेकर नवरात्रि के अंतिम दिन श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार आयोजित होने वाली नगर पूजा में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पूरी महाराज और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने माता महालया और महामाया को भोग लगाकर अष्टमी पर्व की शुरुआत की.
गौरतलब है कि गत एक अप्रैल से उज्जैन सहित प्रदेश के 19 शहरों में शराबबंदी लागू हो चुकी है. ऐसे में इस बार शनिवार को चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर नगर पूजा के लिए आबकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ही एक पेटी देसी शराब और दो बोतल अंग्रेजी शराब लेकर चौबीस खंबा माता मंदिर पहुंचे. इस बार देवी महालया और महामाया को सीधे बोतल से मदिरा अर्पित करने की जगह चांदी के पात्र में मदिरा भरकर चढ़ाई गई. शनिवार सुबह आठ बजे चौबीस खंबा माता मंदिर से नगर पूजा प्रारंभ हुई. नगर पूजा में निरंजनी अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर चारधाम मंदिर पीठाधीश्वर स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरी महाराज शामिल रहे.
रविंद्र पूरी महाराज द्वारा चौबीस खंबा मंदिर में माता महालाया और महामाया का पूजन सम्पन्न होने के बाद शासकीय दल नगर पूजा के लिए निकला. दल में आगे कोटवार परंपरा के अनुसार मदिरा से भरी मिट्टी की हांडी लेकर चलते है. मिट्टी की हांडी से मदिरा की धार पूरे नगर के रास्तों में बहती है. शासकीय दल के सदस्य 12 घंटे तक 27 किलोमीटर के दायरे में आने वाले चामुंडा माता, भूखी माता, काल भैरव, चंडमुंड नाशिनी सहित 40 देवी, भैरव व हनुमान मंदिरों में पूजन करेंगे. माताजी और भैरवजी को जहां मदिरा का भोग लगाया जाता है. वहीं हनुमान मंदिरों में ध्वजा अर्पित की जाती है.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पूरी महाराज ने बताया कि प्राचीन समय से नगर पूजा होती आ रही है. उज्जैन वासियों की सुख समृद्धि के लिये 28 किलोमीटर मार्ग पर मदिरा की धार लगाई जाती है. एक हांडी में कोटवार मदिरा चलते हैं और रास्ते में आने वाले प्रमुख देवी मंदिर और भैरव मंदिरों में नया ध्वज और चोला चढ़ाया जाता है. माता रानी को पूजन सामग्री के साथ शहर के सभी मंदिरों में मदिरा का भोग लगाया जाएगा और रात 8 बजे अंकपात मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में नगर पूजा का समापन होगा. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता डॉ. गोविंद सोलंकी ने बताया कि यात्रा के पश्चात छह अप्रैल को बड़नगर रोड स्थित पंचायती अखाड़ा निरंजनी में भव्य कन्या पूजन के साथ भंडारे का आयोजन होगा.
राजा विक्रमादित्य करते थे देवी और भैरव पूजन
नगर पूजा का इतिहास हजार साल पुराना है. बताया जाता है कि उज्जयिनी के राजा सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल से ही चौबीस खंबा माता मंदिर में नगर पूजन किया जाता है. सम्राट विक्रमादित्य माता महालाया और महामाया के साथ ही भैरव का पूजन कर नगर पूजा करते थे. जिससे नगर में समृद्धि और खुशहाली बनी रहे. किसी बिमारी या प्राकृतिक प्रकोप का भय नही रहे. इसी लिए नवरात्रि पर्व के महाअष्टमी पर पूजन कर माता और भैरव को भोग लगाया जाता है. जिससे माता और भैरव प्रसन्न होकर नगर की रक्षा करें.
तोमर
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