भारत-बांग्लादेश संबंध: बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ते संबंधों के बीच, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के खिलाफ एक गंभीर आरोप लगाया है। सरकार के सूचना सलाहकार महफूज आलम ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के एक लाख से अधिक सदस्य भारत में शरण ले चुके हैं। यह दावा उन्होंने एक ईद समारोह के दौरान किया, जिसमें शेख हसीना के शासनकाल में लापता हुए लोगों के परिजन भी शामिल थे।
बांग्लादेशी समाचार पोर्टल BDNews24.com के अनुसार, यह कार्यक्रम मानवाधिकार संगठन 'मेयर डाक' द्वारा तेजगांव क्षेत्र में आयोजित किया गया था। सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस ने भी इस बयान की पुष्टि की है। महफूज आलम ने शेख हसीना पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तानाशाह करार दिया।
भारत पर शरण देने का आरोप भारत पर शरण देने का आरोप
महफूज आलम ने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत ने शेख हसीना और उनकी उग्रवादी ताकतों को शरण देने का निर्णय लिया है। हमारे पास जानकारी है कि 1 लाख से अधिक अवामी लीग के सदस्य भारत में शरण ले चुके हैं और भारत सरकार ने उन्हें स्वीकार भी किया है।"
शेख हसीना पर गंभीर आरोप शेख हसीना पर गंभीर आरोप
महफूज आलम ने यह भी कहा कि 2013 और 2014 के दौरान जब लोग अपने मताधिकार के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब जबरन गायब होने की घटनाएं सबसे अधिक हुईं। उन्होंने यह दावा किया कि ये घटनाएं सुनियोजित तरीके से बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया को नष्ट करने के लिए की गई थीं। वर्तमान सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं, जबकि अन्य की जांच अभी भी जारी है।
हसीना पर साजिश रचने का आरोप हसीना पर साजिश रचने का आरोप
आलम ने आगे कहा कि शेख हसीना सत्ता से बाहर होने के बावजूद भारत में रहकर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश रच रही हैं। उन्होंने इसे बांग्लादेश की संप्रभुता के लिए खतरा बताया। इसके साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि हसीना की अवामी लीग पार्टी एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह कार्य कर रही है, जिसे अब दोबारा राजनीतिक प्रभाव हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के आरोप अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के आरोप
महफूज आलम ने यह भी कहा कि शेख हसीना और उनके कुछ शीर्ष मंत्रियों तथा सलाहकारों पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप लगाए हैं। यह न्यायाधिकरण पूर्ववर्ती सरकार द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान नरसंहार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित किया गया था।
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