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तिग्मांशु धूलिया ने यंग जनरेशन को लेकर कही दिलचस्प बात, कहा- आज के युवाओं में है फोकस की कमी

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तिग्मांशु धूलिया ने यंग जनरेशन को लेकर कही दिलचस्प बात, कहा- आज के युवाओं में है फोकस की कमी

तिग्मांशु धूलिया हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा नामों में से हैं जिन्होंने न केवल निर्देशन में खुद को साबित किया है, बल्कि अभिनय में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पर्दे के आगे और पीछे दोनों जगह उनका अनुभव गहरा और बहुमुखी रहा है। उन्होंने कई ऐसी फिल्में बनाई हैं जो आज कल्ट सिनेमा का हिस्सा मानी जाती हैं। उनके साथ काम करने वाले कलाकारों में भी कई दिग्गज शामिल रहे हैं।

हाल ही में तिग्मांशु ने एक इंटरव्यू में यंग जनरेशन के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा किया। इस बातचीत में उन्होंने कुछ ऐसी बातें कही हैं जिनसे बहुत से लोग खुद को जोड़ पाएंगे।

युवाओं के साथ काम करने का अनुभव

एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में तिग्मांशु धूलिया ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी के साथ काम करना एक अलग तरह का अनुभव रहा है। उन्होंने साफ किया कि उन्हें नई पीढ़ी से कोई शिकायत नहीं है, बल्कि वे युवाओं को पसंद करते हैं और मानते हैं कि उनके पास नए विचार होते हैं, जिनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

तिग्मांशु ने एक वेब सीरीज ‘गर्मी’ का उदाहरण दिया, जो छात्र राजनीति पर आधारित थी। इस शो में 20-22 साल के युवा कलाकारों के साथ उन्होंने काम किया। उन्होंने बताया कि एक सीन में उन्होंने एक अभिनेता को पूरी तरह सीन समझाया, लेकिन जैसे ही कैमरा चालू हुआ, वह एकदम ब्लैंक हो गया।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आज की पीढ़ी की दिमाग और शरीर की ‘वायरिंग’ कुछ अलग हो गई है। ये लोग ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। हर समय फोन में लगे रहते हैं। इतनी जानकारी लेकर करोगे क्या? जानकारी तो है, लेकिन विश्लेषण करने की क्षमता नहीं है। ऐसा करने से काम कैसे होगा?”

फिल्मों की दुनिया में तिग्मांशु की पहचान

तिग्मांशु धूलिया ने निर्देशन में अपना सफर फिल्म हासिल से शुरू किया था, जिसमें इरफान खान और जिमी शेरगिल मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म को न केवल आलोचकों ने सराहा, बल्कि दर्शकों ने भी इसे खूब पसंद किया। इसके बाद उन्होंने मिलन टॉकीज, बुलेट राजा, साहब बीवी और गैंगस्टर, रात अकेली है जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। वह बैंडिट क्वीन जैसी चर्चित फिल्म से भी जुड़े रहे हैं।

तिग्मांशु की बातें एक गहरी सच्चाई को उजागर करती हैं। तकनीक और जानकारी के इस दौर में युवा पीढ़ी के पास संसाधन तो हैं, लेकिन काम के प्रति एकाग्रता और गहराई कहीं खोती जा रही है। उनका अनुभव बताता है कि सिर्फ जानकारी ही काफी नहीं, बल्कि उसे समझने और सही दिशा में इस्तेमाल करने की भी ज़रूरत है।

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