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DRDO और भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक किया MRSAM मिसाइल का परीक्षण, सटीकता से हवा में लक्ष्य किए ध्वस्त

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DRDO और भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक किया MRSAM मिसाइल का परीक्षण, सटीकता से हवा में लक्ष्य किए ध्वस्त

भारत की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए देश लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने में जुटा है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सेना ने संयुक्त रूप से मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण भारतीय थल सेना के संस्करण का था, जिसके अंतर्गत चार उड़ान परीक्षण किए गए, और सभी लक्ष्य पर सटीकता से निशाना लगाने में सफल रहे।

कहां हुआ परीक्षण?

ये परीक्षण 3 और 4 अप्रैल को ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप पर किए गए। मिसाइलों को हाई-स्पीड हवाई लक्ष्यों के विरुद्ध लॉन्च किया गया था। सभी परीक्षणों में मिसाइलों ने हवा में लक्ष्य को सटीकता से भेदा और उन्हें सफलतापूर्वक नष्ट किया।

परीक्षणों में क्या रहा खास?

चारों परीक्षण अलग-अलग परिस्थितियों में किए गए—लंबी दूरी, छोटी दूरी, ऊंचाई पर और निम्न ऊंचाई पर। सभी मामलों में मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को पूरी तरह से भेदकर हथियार प्रणाली की परिचालन क्षमता और दक्षता को सिद्ध किया।

इन परीक्षणों के दौरान प्राप्त आंकड़ों को रडार और इन्फ्रारेड ट्रैकिंग सिस्टम जैसे रेंज उपकरणों से सत्यापित किया गया, जिन्हें इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर द्वारा तैनात किया गया था।

सेना की दो कमांड्स से हुआ परीक्षण

यह परीक्षण DRDO के मार्गदर्शन में भारतीय सेना के पूर्वी और दक्षिणी कमांड द्वारा किया गया। इसने दोनों कमांड्स की संचालनात्मक क्षमताओं को प्रमाणित किया और इन हथियार प्रणालियों को दो रेजीमेंट्स में तैनात करने की दिशा में अहम रास्ता खोल दिया है।

किसके लिए बनाई गई है यह मिसाइल प्रणाली?

MRSAM प्रणाली को DRDO ने इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए विशेष रूप से विकसित किया है। यह प्रणाली मल्टी-फंक्शन रडार, कमांड पोस्ट, मोबाइल लॉन्चर और अन्य जरूरी वाहनों से सुसज्जित है, जो इसकी परिचालन दक्षता को और भी अधिक मजबूत बनाते हैं।

रक्षा मंत्री और DRDO अध्यक्ष ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता के लिए DRDO, भारतीय सेना और रक्षा उद्योग से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी है। वहीं, DRDO के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव समीर वी. कामत ने इसे भारतीय सेना की शक्ति को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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