नई दिल्ली, 5 अप्रैल . देश के सबसे बड़े स्टार्टअप समागम, “स्टार्टअप महाकुंभ” में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने उद्यमिता के महत्व और भविष्य में इस दिशा में किए जाने वाले कार्यों के बारे में बातचीत की. भारत के तेजी से बदलते हुए उद्यमिता माहौल में, जयंत चौधरी ने बताया कि कैसे उद्यमिता केवल एक कौशल नहीं, बल्कि एक मानसिकता है; इसके विचार को बच्चों के मन में छोटी उम्र से ही डाला जाना चाहिए.
जयंत चौधरी ने कहा कि उद्यमिता के लिए जोखिम लेना जरूरी है. अगर आप जोखिम से बचने की सोचते हैं तो बेहतर है कि आप नौकरी करें, लेकिन यदि आप रोजगार देने का ख्वाब रखते हैं, तो आपको जोखिम उठाने की क्षमता विकसित करनी होगी. आपकी पहली योजना आपको करोड़पति नहीं बनाएगी, यह सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है.
नेता बनने के सवाल पर चौधरी ने इस पर भी चर्चा की कि क्या नेता जन्म से होते हैं या वे बनाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं, लेकिन नेताओं का निर्माण संघर्ष, धैर्य और लचीलापन से होता है. हर व्यक्ति को सीखना चाहिए कि कैसे हार को स्वीकार करें और कठिनाइयों के बावजूद आगे बढ़ें.
जयंत चौधरी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नीति के जरिए अब भारत में बच्चों को उद्यमिता की दिशा में प्रशिक्षित करने के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है. भारतीय शिक्षा प्रणाली में अब अनुभव आधारित शिक्षा और तकनीकी कौशल को महत्व दिया जा रहा है, ताकि बच्चे केवल किताबों के ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें असली दुनिया में काम करने की समझ हो.
उन्होंने बताया कि कौशल विकास के क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत विभिन्न राष्ट्रीय मानक तैयार किए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों को न केवल तकनीकी कौशल मिले, बल्कि वे संगठनों में काम करने के लिए तैयार भी हों. देश में नौकरी देने वालों की संख्या बढ़ाने के लिए कई पहल की जा रही हैं, और यह एक नया भारत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
चौधरी ने इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के ‘स्टैंडअप इंडिया’ अभियान जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी की दृष्टि यही है कि हमें एक ऐसा राष्ट्र बनाना है जहां लोग रोजगार पाने के लिए नहीं, बल्कि रोजगार देने के लिए खड़े हों. उन्होंने स्टार्टअप क्षेत्र में हो रहे बदलावों और तेजी से बढ़ती तकनीकी नवाचारों के बारे में भी बात की और यह बताया कि अब युवा पीढ़ी अधिक आत्मनिर्भर और सृजनात्मक हो रही है.
उन्होंने अंत में शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता की बात करते हुए कहा कि अब यह जरूरी है कि हम स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक एक नई सोच विकसित करें, ताकि विद्यार्थी केवल किताबों का ज्ञान न लें, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और नवाचार को भी समझें. उन्होंने सभी उद्यमियों को अपने संस्थानों में लौटकर छात्रों से जुड़ने का आह्वान किया, क्योंकि आज के बच्चे भविष्य के बड़े नेता और उद्यमी बनने की क्षमता रखते हैं.
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पीएसएम/एकेजे
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