रतलाम, 29 अगस्त . Madhya Pradesh सरकार के ‘माटी के गणेश’ अभियान से प्रेरित होकर रतलाम के जावरा में ‘ज्वाला श्री गणेश उत्सव समिति’ ने 15वें गणेशोत्सव में इतिहास रच दिया. समिति के तैयार किए गए गणेश प्रतिमा को लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली है.
समिति की ओर से निर्मित 22 फीट ऊंची मिट्टी की गणेश प्रतिमा को ‘चौपाटी के राजा’ के नाम से जाना जाता है. इस प्रतिमा ने न केवल शहरवासियों का दिल जीता, बल्कि लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और वेब वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपनी जगह बनाई. इस उपलब्धि ने जावरा को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित किया है.
लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ज्यूरी ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर जावरा पहुंचकर विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय और समिति सदस्यों को प्रमाण पत्र सौंपा. इस दौरान ज्यूरी सदस्य शैलेंद्र सिंह सिसोदिया और धरम यादव के साथ Madhya Pradesh जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय भी उपस्थित थे. विधायक डॉ. पांडेय ने इसे न केवल समिति की, बल्कि पूरे जावरा विधानसभा और Madhya Pradesh की उपलब्धि बताया.
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि 22 फीट ऊंची, 10 फीट चौड़ी और 6 फीट मोटी (मिट्टी की परत वाली) प्रतिमा को मृदा आकृति मूर्ति आर्ट्स, उज्जैन ने तैयार किया है. बंगाल के 10 कारीगरों ने तीन महीने की कड़ी मेहनत से इसे बनाया. समिति ने इस प्रतिमा को विश्व रिकॉर्ड के लिए नामांकित किया था, जिसे चयनित कर लिया गया. यह प्रतिमा अब शहर के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है.
समिति सदस्य राकेश राठौड़ ने कहा, “पिछले 15 वर्षों से मूर्ति की स्थापना की जा रही है. इतने सालों के बाद जावरा के लिए अब ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण आया है. यह जावरा की नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी मूर्ति है. पूरी दुनिया में जहां एक ओर सभी मूर्तियां पीओपी से बन रही हैं, वहीं हमने श्री गणेश की मूर्ति पूरी तरह से गंगा की मिट्टी से बनाई है, जिसके कारण इसे लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और वेब वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली. इस उपलब्धि का पूरा क्षेत्र ‘ज्वाला श्री गणेश समिति’ के सदस्यों को जाता है, वे पूरी तरह से बधाई के पात्र हैं.”
उन्होंने 9 दिनों के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा, “समिति द्वारा नौ दिनों का रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन होता है. कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियां दी जाती हैं. इसमें स्कूली बच्चे भी शामिल होते हैं. कवि सम्मेलन का भी आयोजन होता है.”
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एससीएच/केआर
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