कड़ी मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है, और यह सच साबित हुआ है छत्तीसगढ़ के कोंडागांव के मृदा शिल्पकार अशोक चक्रधारी के लिए। उन्होंने एक ऐसा मिट्टी का दीया तैयार किया है, जो लगातार 40 घंटे तक जलता है। इस अद्भुत उपलब्धि के लिए उन्हें राष्ट्रीय मेरिट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।
दीये की बढ़ती मांग
अशोक चक्रधारी ने बताया कि इस साल नवरात्रि के दौरान किसी ने उन्हें फोन करके बताया कि उनका बनाया हुआ दीया वायरल हो गया है। इसके बाद से उन्हें रोजाना 50 से 60 दीये बनाने के ऑर्डर मिल रहे हैं। उन्होंने इन दीयों की कीमत 200 से 250 रुपये रखी है।
दीये की निर्माण प्रक्रिया
अशोक ने बताया कि इस विशेष दीये को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। सबसे पहले मिट्टी से दीया तैयार किया जाता है, फिर एक गुंबद में तेल भरा जाता है। दीये को पलटकर रखा जाता है, जिससे गुंबद में मौजूद टोटी से तेल धीरे-धीरे टपकता है। जब दीये का तेल खत्म होता है, तो टोटी से फिर से तेल गिरने लगता है।
दीये की विशेषताएँ
इस दीये की खासियत यह है कि यह 24 से 40 घंटे तक जलता है। जब गुंबद में तेल भर जाता है, तो रिसाव रुक जाता है, जो हवा के दबाव के कारण होता है। अशोक चक्रधारी कई वर्षों से इस कला में लगे हुए हैं और हाल ही में उन्होंने यह अनोखा दीया बनाया है।
अशोक चक्रधारी का अनुभव
अशोक चक्रधारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह इस कला को लेकर बहुत उत्साहित हैं और लोगों की प्रतिक्रिया देखकर उन्हें खुशी होती है।
दीये की तस्वीर
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