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करणी माता मंदिर में भक्त ने रचा इतिहास, किया ऐसा कार्य जो आज तक किसी ने नहीं किया, हर तरफ हो रही बस इसी की चर्चा

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बीकानेर में पहली बार देशनोक करणी माता को बादाम हलवे का भोग लगाया गया। यह एक-दो किलो नहीं बल्कि 16500 किलो बादाम हलवा था, जिसे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। बीकानेर के इतिहास में यह पहली बार है जब करणी माता जी को बादाम हलवे का भोग लगाया गया। बादाम हलवा बीकानेर के प्रसिद्ध समाजसेवी नोखा के मूलवास गांव निवासी ब्रह्मलीन गौसेवी संत पदमाराम कुलरिया के पुत्र कानाराम, शंकर और धर्मचंद कुलरिया ने तैयार किया। यह हलवा मंदिर परिसर में सावन भादो की कड़ाई में तैयार किया गया।

हलवा बनाने में ये हैं सामग्री
पदमाराम कुलरिया के पुत्र शंकर कुलरिया ने लोकल 18 को बताया कि बादाम हलवा बनाने का काम दो महीने पहले ही शुरू हो गया था। इसमें कई कारीगर लगे हुए हैं। इस बादाम हलवे को बनाने में करीब 6600 किलो बादाम, 5 टन शुद्ध देसी घी, 175 ग्राम कश्मीरी केसर, 4700 किलो चीनी, 75 किलो इलायची, 125 किलो पिस्ता, फूलों का इस्तेमाल किया गया है. इस बादाम हलवे को भक्तों में बांटा गया। इसके अलावा आसपास के गांवों के लोगों को भी यह प्रसाद बांटा गया।

भक्त अपनी श्रद्धा से चढ़ाते हैं प्रसाद
शंकर कुलरिया लोकल 18 को आगे बताते हैं कि देशनोक करणी माता मंदिर में सावन-भादवा की कड़ाही प्रसाद का आयोजन विशेष रूप से नवरात्रि पर किया जाता है. भामाशाह और भक्त अपनी श्रद्धा से इसे बनवाते हैं। मान्यता है कि महाराजा गंगा सिंह ने सबसे पहले एक विशाल कड़ाही बनवाई थी। इस कड़ाही का वजन 300 किलो से ज्यादा है। इसमें हलवा बनाकर माता को भोग लगाया जाता है और फिर भक्तों में बांटा जाता है। इस कड़ाही का प्रसाद पूरे देशनोक सहित मंदिर में आने वाले भक्तों में बांटा जाता है।

25 हजार चूहों वाली माता का मंदिर
बीकानेर से 35 किलोमीटर दूर देशनोक में करणी माता का मंदिर स्थित है, जिसे चूहे वाली माता के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में 25 हजार से ज्यादा चूहे रहते हैं। यहां चूहों को काबा कहा जाता है। इस मंदिर में सफेद चूहे को देखना बहुत शुभ माना जाता है।

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